चार मंत्री तो गए, कई और हटाए जाएंगे

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सरकार में फेरबदल करेंगे इसका स्पष्ट संकेत मिल रहा है। पहले कभी ऐसा नहीं हुआ कि मोदी सरकार में फेरबदल के इतने स्पष्ट संकेत मिलें। इस बार ऐसा हो रहा है। कम से कम चार मंत्रियों की सरकार से विदाई स्पष्ट हो गई है। पहले कभी ऐसा नहीं होता था। ये चार मंत्री हैं पंकज चौधरी, हर्ष मल्होत्रा, रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन। सबसे पहले भाजपा ने वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश का अध्यक्ष बनाया। वे अभी दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। अगले साल राज्य में चुनाव है। इसलिए उनको अध्यक्ष के नाते बहुत मेहनत करनी है। इसलिए वे मंत्री पद छोड़ेंगे। इसके बाद हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली प्रदेश का अध्यक्ष बनाया गया। अगले साल दिल्ली में भी नगर निगम का चुनाव होना है। उनको भी प्रदेश की राजनीति में ज्यादा समय देना है। इसलिए वे केंद्रीय मंत्रिमंडल से बाहर होंगे।

अभी देश में हो रहे राज्यसभा के दोवार्षिक चुनावों में केंद्र सरकार के दो मंत्रियों को उम्मीदवार नहीं बनाया गया है। इनमें एक रवनीत सिंह बिट्टू हैं, जो पंजाब के रहने वाले हैं और राजस्थान से राज्यसभा सांसद हैं और दूसरे जॉर्ज कुरियन हैं, जो केरल के रहने वाले हैं लेकिन मध्य प्रदेश से राज्यसभा में हें। दोनों को टिकट नहीं दी गई है। कहा जा रहा है कि बिट्टू को पंजाब में विधानसभा का चुनाव लड़ाया जाएग। इन दोनों का राज्यसभा का कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है। वैसे दोनों उसके बाद भी छह महीने तक बिना किसी सदन के सदस्य हुए केंद्र में मंत्री रह सकते हैं। लेकिन इसकी संभावना कम है।

तभी इस बात का भी अंदाजा लगाया जा रहा है कि क्या 21 जून से पहले केंद्रीय मंत्रिपरिषद में फेरबदल होगी? इस बात की ज्यादा संभावना है। 15 जून को अधिकमास खत्म हो रहा है। हालांकि इस अधिकमास में ही कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने शपथ ली है और पश्चिम बंगाल व असम में भाजपा की सरकारों का विस्तार हुआ है। फिर भी भाजपा के कई नेताओं ने इसके संकेत दिए हैं कि 20 जून के आसपास मोदी सरकार में फेरबदल होगी। जहां तक इस बात का सवाल है कि किन लोगों को मौका मिलेगा तो उसका अंदाजा भी इस बात से लगाया जा रहा है कि जिन राज्यों में मंत्रियों को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है वहां से नया चेहरा आएगा। इसका मतलब है कि दिल्ली और उत्तर प्रदेश से नए चेहरे आएंगे। दिल्ली से बांसुरी स्वराज या कमलजीत सहरावत के नाम की चर्चा है। मनोज तिवारी अपनी तरफ से जोर लगा रहे हैं। उत्तर प्रदेश से एक से ज्यादा चेहरे सरकार में शामिल हो सकते हैं। सुधांशु त्रिवेदी के नाम की सबसे ज्यादा चर्चा है। ऐसे ही पंजाब में अगले साल चुनाव है तो रवनीत सिंह बिट्टू की जगह किसी को मंत्री बनाया जाएगा। भाजपा ने जाट सिख केवल सिंह ढिल्लों को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है तो कोई हिंदू पंजाबी चेहरा सरकार में आ सकता है। पहले राघव चड्ढा के नाम की चर्चा थी। राजस्थान से भी नया चेहरा आएगा और मध्य प्रदेश से भी किसी और को मंत्री बनाया जाएगा। पश्चिम बंगाल में अगर ममता बनर्जी की पार्टी के सांसद टूटते हैं तो उनमें से एक या दो को केंद्र में मंत्री बनाया जा सकता है। जानकार सूत्रों का कहना है कि दो साल के बाद हो रही पहली फेरबदल व्यापक होगी। इसका अर्थ है कि कई मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है। बहरहाल, अब इस बात का इंतजार हो रहा है कि अगले 10 दिन में पहले नितिन नबीन की टीम की घोषणा होती है या मंत्रिपरिषद में बदलाव का ऐलान होता है। दोनों इसी महीने होने की संभावना है।


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