फड़नवीस का कद और बढ़ा

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करीब 11 साल पहले 2014 के अंत में जब देवेंद्र फड़नवीस ने महाराष्ट्र के पहले भाजपाई मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि मराठा वर्चस्व वाले इस प्रदेश में एक ब्राह्मण नेता इतना शक्तिशाली हो जाएगा। 2019 में शिव सेना से तालमेल टूटने और उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने के बाद आमतौर पर यह धारणा थी कि अब भाजपा के लिए मुश्किल होगी और फड़नवीस के लिए तो और ज्यादा मुश्किल होगी। उसी समय फड़नवीस ने यह शेर कहा था, पानी उतरता देख कर किनारे पर घर मत बना लेना, मैं समंदर हूं लौट कर आऊंगा। आज उनके इस शेर की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। विधानसभा चुनाव में अकेले भाजपा को बहुमत के नजदीक पहुंचा देने का श्रेय भी उनको मिला था लेकिन उसके बाद ग्रामीण और शहरी निकाय चुनावों में भाजपा को मिली भारी भरकम कामयाबी ने नेतृत्व की टॉप लीग में उनकी जगह और मजबूत कर दी है। खासतौर से मुंबई महानगरपालिका की जीत ने उनका कद ज्यादा बढ़ाया है। पहली बार मुंबई में भाजपा का मेयर बनने जा रहा है।

असल में देवेंद्र फड़नवीस सरकार और संगठन दोनों के चेहरे के तौर पर उभरे हैं। उनके प्रति संघ का सद्भाव पहले से है। अब उन्होंने संगठन का भी समर्थन पूरी तरह से हासिल कर लिया है। शहरी निकाय चुनावों के बाद उन्होंने पहला फोन मुंबई के अध्यक्ष अमित साटम को किया और दूसरा फोन प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण को किया। फड़नवीस ने यह दिखाया कि भाजपा का संगठन सबसे महत्वपूर्ण है। अपने श्रेय लेने की बजाय उन्होंने संगठन को पहले श्रेय दिया। उन्होंने अपने को संगठन के मुख्यमंत्री के तौर पर स्थापित किया है। वे मुख्यमंत्री बनने के बाद भी पार्टी कार्यकर्ताओं और आम लोगों के लिए हर दिन उपलब्ध होते हैं। इस बात को भी भाजपा संगठन के लोग याद करते हैं कि 2024 के लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में एनडीए के खराब प्रदर्शन के बाद फड़नवीस ने इस्तीफे की पेशकश की थी और दिल से पेशकश की थी।


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