राहुल, प्रियंका के बिना मनरेगा बचाओ आंदोलन

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कांग्रेस पार्टी ने पूरे देश में मनरेगा बचाओ आंदोलन शुरू कर दिया। कांग्रेस करीब 20 दिन से इसकी तैयारी कर रही थी। पिछले महीने 19 दिसंबर को संसद का शीतकालीन सत्र समाप्त होने से ठीक पहले केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना यानी मनरेगा को समाप्त करके विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण यानी वीबी जी राम जी बिल पास कराया था। उसके दो दिन बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिली और यह कानून बन गया। संसद में बिल पेश होने के साथ ही कांग्रेस ने इसका विरोध शुरू कर दिया। बड़े आंदोलन की तैयारी शुरू हो गई। पहले तय किया गया कि 28 दिसंबर को स्थापना दिवस के दिन आंदोलन शुरू होगा। इससे एक दिन पहले कांग्रेस कार्य समिति यानी सीडब्लुसी की बैठक हुई, जिसमें इस पर विचार किया गया है। हालांकि उस दिन दिग्विजय सिंह की वजह से मामला संगठन की कमजोरियों की ओर मुड़ गया। फिर तय किया गया कि पांच जनवरी से आंदोलन होगा। उसके बाद तय हुआ कि 10 जनवरी से आंदोलन शुरू होगा।

सो, लंबी तैयारी के बाद 10 जनवरी से कांग्रेस ने 45 दिन का आंदोलन शुरू किया है। इसे कांग्रेस के कई नेता गेमचेंजर मान रहे हैं। उनको लग रहा है कि मनरेगा को छेड़ कर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने अपनी वह बड़ी भूल कर दी है, जिसका इंतजार कांग्रेस पिछले करीब 12 साल से कर रही है। इतना बड़ा मुद्दा होने और इतनी तैयारी के बावजूद कांग्रेस ने आंदोलन शुरू किया तो न राहुल गांधी मौजूद थे और न प्रियंका गांधी वाड्रा मौजूद थीं। कांग्रेस के संचार विभाग के प्रमुख जयराम रमेश ने आंदोलन शुरू होने की घोषणा कर दी। सोचें, 45 दिन का बड़ा आंदोलन है, जिसमें दिल्ली से लेकर राज्यों के मुख्यालय और जिला व प्रखंड स्तर पर प्रदर्शन होगा। राजभवनों के घेराव की योजना है। लेकिन कांग्रेस के दोनों शीर्ष नेता इस आंदोलन का चेहरा नहीं हैं। यह भी ध्यान रखने की बात है कि संसद में जब इस बिल पर चर्चा हुई तब भी सोनिया व राहुल गांधी या प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस बहस में हिस्सा नहीं लिया था। राहुल उस समय भी विदेश में थे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी लड़ाई लड़ी।

पहले ऐसा लग रहा था कि कांग्रेस आंदोलन की तारीख इसलिए बढ़ा रही है ताकि राहुल गांधी वियतनाम के दौरे से लौट आएं तो वे इसका नेतृत्व करें। कम से कम पहले दिन के प्रदर्शन में वे शामिल हों। लेकिन पता नहीं है कि वे वियतनाम से लौटे या नहीं। इस बीच खबर आई कि छह जनवरी को प्रियंका गांधी वाड्रा भी अमेरिका के निजी दौरे पर चलीं गईं। सोनिया गांधी की सेहत अच्छी नहीं है और पिछले हफ्ते अस्थमा की परेशानी के कारण उनको अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था। सो, कांग्रेस के बड़े नेताओं के बिना आंदोलन शुरू हो गया है। हो सकता है कि डेढ़ महीने के इस आंदोलन के बीच में राहुल व प्रियंका इसमें शामिल हों लेकिन अगर कांग्रेस को लग रहा है कि यह बड़ा मौका है और ग्रामीण स्तर पर मनरेगा के समर्थन में लोगों को इकट्ठा किया जा सकता है तो बड़े नेताओं को इसका नेतृत्व संभालना चाहिए। भाजपा विरोधी राज्यों की सरकारें विधानसभा से इसके खिलाफ प्रस्ताव पास कर रही हैं और इसका विरोध कर रही हैं। उनको भी साथ जोड़ने का प्रयास कांग्रेस के नेता करते तब भी इसे बड़ा मुद्दा बनाया जा सकता था।


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