नेशनल कॉन्फ्रेंस ने लड़ने का फैसला किया

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लोकप्रिय धारणा से उलट अब्दुल्ला पिता पुत्र ने भाजपा और केंद्र सरकार के सामने झुक कर समझौता करने की बजाय लड़ने का रास्ता चुना है। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने राज्य की सभी चार राज्यसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। फारूक और उमर अब्दुल्ला को पता है कि चौथी सीट जीतने के लिए भाजपा को हराना होगा। ध्यान रहे भाजपा ने भी सभी सीटों पर लड़ने का फैसला किया है लेकिन उसको पता है कि लड़ाई सिर्फ एक सीट पर होनी है। बाकी तीन सीटें स्वाभाविक रूप से सत्तारूढ़ दल को मिलेंगी। चुनाव की अधिसूचना इस हिसाब से जारी होती है, जिससे सत्तारूढ़ दल या गठबंधन को फायदा होता है। पहली दो सीटों की अधिसूचना अलग अलग जारी हुई है। ये सीटें जीतने के लिए 45-45 वोट की जरुरत है। बाकी दो सीटों की अधिसूचना एक साथ जारी हुई तो उनको जीतने के लिए 30-30 वोट की जरुरत है। पहले लग रहा था कि कोई टकराव नहीं होगा। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अपनी पार्टी के तीन उम्मीदवार उतारेंगे और चौथी सीट भाजपा के लिए छोड़ देंगे, जिसके 28 विधायक हैं। लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। इसलिए 24 अक्टूबर को राज्यसभा की सभी चार सीटों पर चुनाव होंगा।

सबसे हैरान करने वाली बात कांग्रेस की रही, जिसने चौथी सीट पर लड़ने की हिम्मत नहीं की। उमर अब्दुल्ला ने पहले तीन ही उम्मीदवारों की घोषणा की थी। चौथी सीट वे कांग्रेस के लिए छोड़ना चाहते थे। लेकिन कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष तारिक हमीद कारा ने कहा कि भाजपा के 28 विधायक हैं इसलिए वह सीट जीतने की संभावना नहीं है। हार के डर से कांग्रेस ने चौथी सीट नहीं ली। कांग्रेस पहली या दूसरी सीट चाहती थी, जिसे वह नेशनल कॉन्फ्रेंस के वोट से जीत लेती। कांग्रेस के पास अब गुलाम नबी आजाद किस्म का कोई नेता भी नहीं है, जो जोखिम वाली सीट लेकर अपने प्रबंधन से उसे जीत ले। तभी कांग्रेस ने जोखिम नहीं लिया और सीट छोड़ दी तो मजबूरी में नेशनल कॉन्फ्रेंस को उस सीट पर उम्मीदवार उतारना पड़ा क्योंकि पहले तीन सीटों पर भाजपा उम्मीदवार उतार चुकी है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने पिछले हफ्ते चौधरी मोहम्मद रमजान, शम्मी ओबेरॉय और सज्जाद किचलू को उम्मीदवार बनाने की घोषणा की थी। अब उसने सोमवार को चौथे उम्मीदवार के रूप में इमरान नबी डार की घोषणा की है। पार्टी ने क्षेत्रीय और जातीय संतुलन का पूरा ध्यान रहा है। मोहम्मद रमजान कुपवाड़ा के हैं तो सज्जाद किचलू किश्तवाड़ के हैं। ओबेरॉय बरसों से पार्टी के कोषाध्यक्ष हैं और उनके जरिए मुस्लिम व पंजाबी, सिख समीकरण सधता है। चौथे उम्मीदवार डार नेशनल कॉन्फ्रेंस की मीडिया टीम से जुड़े रहे हैँ। चौथा उम्मीदवार उतारने के बाद उमर ने कहा कि यह सीट जीतने का सबसे अच्छा मौका कांग्रेस के लिए था लेकिन वह तैयार नहीं हुई। अब उमर ने इस चुनाव को कश्मीरी पहचान से जोड़ दिया है। उन्होंने कहा है कि भाजपा के 28 विधायक हैं और सीट जीतने के लिए 30 वोट की जरुरत है। अगर कश्मीर की पार्टियों के विधायक अपना वोट भाजपा को नहीं देते हैं तो भाजपा नहीं जीतेगी। हालांकि वे खुद इस बात से चिंतित हैं कि भाजपा ने सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं तो इसका मतलब है कि वह पैसे और ताकत के दम पर क्रॉस वोटिंग कराने का प्रयास करेगी। गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर विधानसभा में दो सीटें खाली हैं, जिन पर उपचुनाव की घोषणा हो गई है। बची हुई 88 सीटों में से नेशनल कॉन्फ्रेंस की 41, भाजपा की 28 और कांग्रेस की छह सीटें हैं। इसके अलावा सीपीएम की एक, पीडीपी की तीन, आप की एक, एआईपी की एक, अन्य की एक और छह निर्दलीय हैं। चार निर्दलियों का समर्थन सरकार को है।


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