अब भाजपा की महिला अध्यक्ष की चर्चा

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भारतीय जनता पार्टी में वैसे तो अध्यक्ष पद की चर्चा थम गई है और यह माना जा रहा है कि नवंबर में बिहार विधानसभा का चुनाव होने के बाद ही नए अध्यक्ष की घोषणा होगी। लेकिन कोई दावे के साथ नहीं कह सकता है। आखिर 75 साल में रिटायर होने वाली बातों की चर्चा समाप्त हो गई है और यह तय हो गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो चाहेंगे उसी हिसाब से काम होगा। इसलिए वे कभी भी अध्यक्ष का नाम तय कर सकते हैं और उसके बाद चुनाव औपचारिकता होगी। इस बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि भाजपा को पहली महिला अध्यक्ष मिल सकती है। इसके लिए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नाम की चर्चा हो रही है। कई लोग महिला अध्यक्ष के तौर पर वसुंधरा राजे का नाम चला कर थक चुके हैं। उससे भी पहले स्मृति ईरानी के नाम की भी चर्चा खूब चली थी। लेकिन अब घूम फिर कर निर्मला सीतारमण का नाम लिया जा रहा है।

उनके नाम की चर्चा तब तेज हुई, जब उनके सरकारी आवास में सीपीडब्लुडी ने रेनोवेशन का काम शुरू किया। खबर आई की उनके आवास में कई हॉल बन रहे हैं और लोगों से मिलने जुलने के लिए कमरे बन रहे हैं। इस आधार पर कहा जाने लगा कि वे अध्यक्ष बनने जा रही हैं। हालांकि जानकार सूत्रों का यह भी कहना है कि उनके सरकारी आवास में पिछले एक दशक से रेनोवेशन नहीं हुई थी इसलिए रूटीन के काम हो रहे हैं। बहरहाल, इससे शुरू हुई चर्चा में अब उनके समर्थन में कई तर्क दिए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि जिस तरह से भाजपा ने तमिलनाडु से आने वाले पार्टी के पुराने नेता सीपी राधाकृष्णन को उप राष्ट्रपति बनवाया है उसका बड़ा सकारात्मक संदेश है। अगर भाजपा अध्यक्ष भी तमिलनाडु से हो तो अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा को फायदा होगा।

यह भी कहा जा रहा है कि निर्मला सीतारमण पार्टी की प्रवक्ता रही हैं और खूब पढ़ी लिखी हैं। कई वित्तीय फैसलों से खास कर आयकर छूट की सीमा बढ़ाने और जीएसटी की दरों में कटौती के बाद मध्य वर्ग में उनको ज्यादा पसंद किया जाने लगा है। इसलिए उनको अध्यक्ष बनाने से भाजपा को अपने कोर वोट आधार यानी मध्य वर्ग को खुश रखने में आसानी होगी। उनके समर्थन में और भी की तर्क दिए जा रहे हैं, जिसमें अगड़ा और पिछड़ा के संतुलन का भी तर्क है।

परंतु क्या राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ उनके नाम पर राजी होगा? जानकार सूत्रों का कहना है कि संघ ने भले औपचारिक रूप से अपने को भाजपा संगठन के काम से दूर रखा हो लेकिन ऐसे किसी व्यक्ति को अध्यक्ष बनाने पर वह सहमत नहीं होगा, जिसका संघ से नाता नहीं रहा हो। गौरतलब है कि निर्मला सीतारमण संघ से नहीं जुड़ी रही हैं। दूसरा कारण यह बताया  जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वित्त मंत्रालय में उनके कामकाज से संतुष्ट हैं और वहां से हटाने के पक्ष में नहीं हैं। इसके बावजूद उनके नाम की चर्चा थम नहीं रही है। कहा जा रहा है कि निर्मला सीतारमण देश की पहली पूर्णकालिक रक्षा मंत्री और पहली पूर्णकालिक वित्त मंत्री बनी हैं। उनसे पहले इन दोनों अहम मंत्रालयों का प्रभार इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री रहते संभाला था। इस आधार पर उम्मीद जताई जा रही है कि जब मोदी ने इतने बड़ा रिकॉर्ड उनसे बनवाए हैं तो हो सकता है कि भाजपा की पहली महिला अध्यक्ष बनने का रिकॉर्ड भी उनके नाम से बने।


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