डीयू में एबीवीपी को मिली जीत

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नई दिल्ली। जंतर मंतर पर हुए छात्रों के प्रदर्शन के बाद युवाओं व छात्रों की नाराजगी के बीच सबकी नजर दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ यानी डूसू के चुनावों पर थी। शनिवार को आए नतीजों में एक बार फिर राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ यानी आरएसएस से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने बाजी मारी है। कांटे की टक्कर में एबीवीपी ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की। अध्यक्ष पद पर उसके यश डबास जीते। कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई को एक भी सीट नहीं मिली। लेफ्ट का गठबंधन भी नाकाम रहा।

अध्यक्ष पर पर एबीवीपी के यश डबास ने एनएसयूआई के जितेंद्र कुमार मीणा को दो हजार के करीब वोटों से हराया। उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन ने रिकॉर्ड बनाया। 17 साल के बाद डूसू के सेंट्रल पैनल में किसी पद पर निर्दलीय की जीत हुई है। शौकीन को 30 हजार से ज्यादा वोट मिले। एनएसयूआई से टिकट नहीं मिलने के बाद वे निर्दलीय लड़े थे। सबसी बड़ी जीत उनकी है। इससे पहले 2009 में निर्दलीय मनोज चौधरी और 1991 में निर्दलीय राजीव गोस्वामी डूसू के अध्यक्ष बने थे।

एबीवीपी की रिया छावड़ी को सचिव और लक्ष्यराज सिंह को संयुक्त सचिव पद पर जीत मिली। गौरतलब है कि डूसू चुनाव के लिए शुक्रवार को 52 कॉलेजों में मतदान हुआ था। इसमें 40.46 फीसदी वोटिंग हुई। दिल्ली विश्वविद्यालय के 1,51,519 छात्रों में से 61,312 ने मतदान किया।

चुनाव नतीजे के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एबीवीपी को बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया में लिखा, ‘दिल्ली विश्वविद्यालय केवल एक यूनिवर्सिटी नहीं, यहां देश के हर कोने से विद्यार्थी पढ़ने आते हैं। यहां का जनादेश पूरे भारत के युवाओं के मन का प्रतिबिंब होता है। आज एबीवीपी को मिली शानदार जीत उन राष्ट्र विरोधी ताकतों के लिए स्पष्ट संदेश है, जो युवा शक्ति को राष्ट्रविरोधी एजेंडे की प्रयोगशाला बनाना चाहते हैं। देश का युवा आज राष्ट्र प्रथम की विचारधारा के साथ मजबूती से खड़ा है और यही इस जनादेश का सबसे बड़ा संदेश है’।


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