बात तो कहने देते!

Categorized as संपादकीय

चर्चा होने पर संसदीय रिकॉर्ड में यह दर्ज होता कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर विपक्षी खेमों में अविश्वास क्यों गहरा रहा है। बहस के दौरान सत्ता पक्ष भी अपनी बात कहता, जिससे उसके तर्क भी आम लोगों तक पहुंच पाते।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए विपक्ष के प्रस्ताव को राज्यसभा के सभापति और लोकसभा स्पीकर ने ठुकरा दिया है। दोनों सदनों के महासचिवों ने अपनी विज्ञप्तियों में कहा कि “उचित विचार-विमर्श” के बाद पीठासीन अधिकारियों ने ये फैसला लिया। सी.पी. राधाकृष्णन और ओम बिड़ला के इस निर्णय का अर्थ है कि इस विषय पर दोनों सदनों में बहस नहीं होगी। जबकि संबंधित प्रस्ताव पर लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सदस्यों के दस्तखत थे। यानी ऐसे प्रस्ताव पर चर्चा के लिए हस्ताक्षर की जरूरी संख्या विपक्ष के पास है।

प्रस्ताव में उन कारणों का विस्तार से उल्लेख है कि विपक्ष क्यों ज्ञानेश कुमार को सीईसी जैसे महत्त्वपूर्ण संवैधानिक पद पर रहने के योग्य नहीं मानता। विपक्ष की चिंताओं पर सत्ता पक्ष गंभीरता से गौर करे, इसकी अपेक्षा आज के दौर में तो किसी को नहीं होगी! ऐसे में प्रस्ताव पर दलगत आधार पर ही मतदान होने की संभावना थी। उस हाल में विपक्ष के प्रस्ताव का गिर जाना तय था। लेकिन चर्चा होने पर संसदीय रिकॉर्ड में यह दर्ज होता कि जिस चुनावी प्रक्रिया से लोकसभा सहित विधायिका के तमाम निम्न सदन चुने जाते हैं, उस पर विपक्षी खेमों में अविश्वास क्यों गहराता चला जा रहा है।

बहस के दौरान सत्ता पक्ष भी अपनी बात कहता, जिससे आम लोगों के लिए इस बारे में किसी नतीजे पर पहुंचना आसान हो जाता कि विपक्ष की बातों में दम है, या नहीं। वैसे भी किसी पक्ष के मन में बैठे गुबार को निकल जाने देना लोकतंत्र की सेहत के लिए अच्छा समझा जाता है। विपक्ष के साथ-साथ देश की जनता के एक बड़े हिस्से के मन में चुनाव प्रक्रिया लेकर शक गहराई तक समा गया है, जिसके नतीजे अब सामने आने लगे हैं। इससे किस तरह की स्थितियां पैदा हो सकती हैं, उसके कुछ संकेत हाल में पश्चिम बंगाल में देखने को मिले हैं। वैसी घटनाओं का संदेश है कि इस वक्त चुनाव प्रक्रिया से जुड़े तमाम मुद्दों पर खुलकर और विस्तृत बहस की जरूरत है। मगर पीठासीन अधिकारियों ने इस अवसर से देश को वंचित कर दिया है।


Previous News Next News

More News

सम्राट चौधरी : बिहार में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री

April 15, 2026

मंगलवार को नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार में भाजपा युग की शुरुआत हो गई। बिहार में पहली बार भाजपा के मुख्यमंत्री ने शपथ ली, जो भाजपा के लिए ऐतिहासिक है। केंद्रीय कृषि मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता शिवराज सिंह चौहान द्वारा संशय के बादल हटाए जाने के बाद, सम्राट चौधरी के नाम…

पंजाब सरकार ने राघव चड्ढा की सुरक्षा हटाई, केंद्र सरकार ने दी जेड सिक्योरिटी

April 15, 2026

केंद्र सरकार ने आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा को बड़ी सुरक्षा राहत देते हुए जेड कैटेगरी की सुरक्षा प्रदान की है। गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, यह सुरक्षा दिल्ली व पंजाब दोनों जगह लागू होगी और अर्धसैनिक बल उनके सुरक्षा कवच का जिम्मा संभालेंगे।  जानकारी के अनुसार, यह फैसला इंटेलिजेंस…

‘बिहार चौतरफा विकास की नई ऊंचाई हासिल करेगा’, पीएम मोदी ने दी बधाई

April 15, 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता सम्राट चौधरी को बिहार का नया मुख्यमंत्री बनने पर बधाई दी। पीएम मोदी ने कहा कि सम्राट चौधरी के कुशल नेतृत्व में जनता-जनार्दन की आकांक्षाओं को पूरा करते हुए बिहार चौतरफा विकास की नई ऊंचाई हासिल करेगा।  प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म…

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद सम्राट चौधरी पहुंचे सचिवालय

April 15, 2026

बिहार के मुख्यमंत्री की शपथ लेने के बाद सम्राट चौधरी एक्शन में दिख रहे हैं। शपथ लेने के तुरंत बाद वे सचिवालय पहुंचे और कार्यभार संभाल लिया। उन्होंने शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक कर यह साफ संकेत दे दिया कि उनका कार्यकाल कार्य-उन्मुख और परिणाम-आधारित होगा।   बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने…

नोएडा में फैक्ट्रियों के खुलते ही फिर श्रमिकों का हंगामा, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

April 15, 2026

नोएडा में एक बार फिर औद्योगिक गतिविधियों के शुरू होते ही श्रमिकों का आक्रोश सामने आया है। फैक्ट्रियों के खुलने के साथ ही जिले में तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिल रही है। ताजा मामला सेक्टर-63 का है, जहां एक कंपनी के बाहर श्रमिकों ने जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात…

logo