चुनाव आयोग की जवाबदेही

Categorized as संपादकीय

सवाल यह नहीं है कि निर्वाचन प्रक्रिया स्वतंत्र और निष्पक्ष है या नहीं। प्रश्न है कि इसको लेकर लोगों के मन में संशय क्यों है? शक भरे माहौल के कारण ही राजनीतिक गुटों के लिए लोगों को भड़काना आसान हो गया है।

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले माहौल अशांत और अराजक किस्म का है। लोगों के मन पर संदेह और आशंकाओं का साया है। इसकी ही मिसाल मालदा जिले में कलियाचक में देखने को मिली। वहां विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद तैयार मतदाता सूची पर आई आपत्तियों को निपटाने के काम में लगे न्यायिक अधिकारियों को प्रखंड कार्यालय में दस घंटों तक भीड़ ने बंधक बनाकर रखा। अहम मुद्दा यह नहीं है कि इसके पीछे किसका हाथ था। काबिल-ए-गौर यह है कि वहां महिलाओँ और बच्चों समेत ऐसी भीड़ जुटी, जिसके आक्रोश से न्यायिक अधिकारियों को बचाने में घंटों लग गए। सुप्रीम कोर्ट ने उचित ही इस पर नाराजगी जताई।

मगर, इसके लिए सिर्फ स्थानीय अधिकारियों को जवाबदेह मानना सही नहीं होगा। असल उत्तरदायित्व निर्वाचन आयोग का है। आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद से आयोग ने राज्य में अफसरों के रिकॉर्ड- 480 से अधिक- तबादले किए हैँ। इसलिए ऊपर से नीचे तक जो भी अधिकारी तैनात हैं, कर्त्तव्य निर्वहन में उनकी खामी का सर्वोच्च दायित्व आयोग पर जाता है। बहरहाल, उससे भी बड़ा मसला एसआईआर को जिस तरह किया गया, वो है। इस पर दस लाख आपत्तियों आईं, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट के दबाव में जल्दबाजी में निपटाया गया। नतीजतन, ये धारणा बनी कि आयोग ने अपना काम ठीक से नहीं किया है।

इसी कारण विधानसभा चुनाव को लेकर तमाम तरह की ‘साज़िशाना कहानियों’ को बल मिला है। सवाल यह नहीं है कि निर्वाचन प्रक्रिया स्वतंत्र और निष्पक्ष है या नहीं। प्रश्न है कि इसको लेकर लोगों के मन में संशय क्यों है? शक के ऐसे ही माहौल के कारण राजनीतिक गुटों के लिए लोगों को भड़काना आसान हो गया है। राज्य में माहौल कैसा है, इसकी कुछ झलक सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियों से भी मिली है। लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि न्यायालय का हस्तक्षेप भी उन कारणों को दूर नहीं कर पाया, जिनकी वजह से चुनाव प्रक्रिया को लेकर अविश्वास का माहौल बना है। अतः निर्वाचन आयोग की जवाबदेही तय किए जाने की जरूरत है, जिसके तौर-तरीकों से भारत के चुनावों की साख पर सवाल गहराते जा रहे हैं।


Previous News Next News

More News

सम्राट चौधरी : बिहार में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री

April 15, 2026

मंगलवार को नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार में भाजपा युग की शुरुआत हो गई। बिहार में पहली बार भाजपा के मुख्यमंत्री ने शपथ ली, जो भाजपा के लिए ऐतिहासिक है। केंद्रीय कृषि मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता शिवराज सिंह चौहान द्वारा संशय के बादल हटाए जाने के बाद, सम्राट चौधरी के नाम…

पंजाब सरकार ने राघव चड्ढा की सुरक्षा हटाई, केंद्र सरकार ने दी जेड सिक्योरिटी

April 15, 2026

केंद्र सरकार ने आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा को बड़ी सुरक्षा राहत देते हुए जेड कैटेगरी की सुरक्षा प्रदान की है। गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, यह सुरक्षा दिल्ली व पंजाब दोनों जगह लागू होगी और अर्धसैनिक बल उनके सुरक्षा कवच का जिम्मा संभालेंगे।  जानकारी के अनुसार, यह फैसला इंटेलिजेंस…

‘बिहार चौतरफा विकास की नई ऊंचाई हासिल करेगा’, पीएम मोदी ने दी बधाई

April 15, 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता सम्राट चौधरी को बिहार का नया मुख्यमंत्री बनने पर बधाई दी। पीएम मोदी ने कहा कि सम्राट चौधरी के कुशल नेतृत्व में जनता-जनार्दन की आकांक्षाओं को पूरा करते हुए बिहार चौतरफा विकास की नई ऊंचाई हासिल करेगा।  प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म…

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद सम्राट चौधरी पहुंचे सचिवालय

April 15, 2026

बिहार के मुख्यमंत्री की शपथ लेने के बाद सम्राट चौधरी एक्शन में दिख रहे हैं। शपथ लेने के तुरंत बाद वे सचिवालय पहुंचे और कार्यभार संभाल लिया। उन्होंने शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक कर यह साफ संकेत दे दिया कि उनका कार्यकाल कार्य-उन्मुख और परिणाम-आधारित होगा।   बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने…

नोएडा में फैक्ट्रियों के खुलते ही फिर श्रमिकों का हंगामा, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

April 15, 2026

नोएडा में एक बार फिर औद्योगिक गतिविधियों के शुरू होते ही श्रमिकों का आक्रोश सामने आया है। फैक्ट्रियों के खुलने के साथ ही जिले में तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिल रही है। ताजा मामला सेक्टर-63 का है, जहां एक कंपनी के बाहर श्रमिकों ने जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात…

logo