आम समझ के बाहर

Categorized as संपादकीय

शर्टलेस प्रतिरोध मामले में दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों पर आपराधिक षडयंत्र और दंगे में शामिल होने से जुड़ी धाराएं लगाईं। हैरतअंगेज है कि कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इन आरोपों में दम माना और प्रदर्शनकारियों को पुलिस रिमांड में भेज दिया।

लोकतांत्रिक दायरे में हुए प्रतिरोध में शामिल व्यक्तियों को पुलिस रिमांड में भेजा जाए, इस बात के तर्क को समझना सामान्य विवेक से बाहर है। बात तब और बेतुकी लगने लगती है, जब प्रतिरोध का आयोजक संगठन मुख्यधारा का हिस्सा और प्रमुख विपक्षी दल से संबंधित हो। उस संगठन के प्रमुख लिए मीडिया में ‘मास्टरमाइंड’ जैसे शब्द का इस्तेमाल हो, तो यह असहमति के प्रति सुनियोजित ढंग से बढ़ाई गई असहिष्णुता को ही जाहिर करता है। एआई समिट जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन के स्थल पर यूथ कांग्रेस के लोगों को शर्ट उतार कर प्रदर्शन करना चाहिए था या नहीं, यह अलग बहस का मुद्दा है। क्या ऐसा करके उन्होंने भारत की छवि बिगाड़ी, इस सवाल पर अलग- अलग राय हो सकती है। लेकिन तथ्य यह है कि उस विरोध प्रदर्शन के दौरान ना तो कोई हिंसा हुई, और ना ही यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता भारतीय संविधान में प्रतिरोध के तय दायरे से बाहर गए। अधिक से अधिक उन पर निषेधाज्ञा के उल्लंघन का मामला बनता था, जिसे आधुनिक भारत के राजनीतिक इतिहास में एक सामान्य बात समझा जाता रहा है।

मगर इस मामले को लेकर सत्ताधारी हलकों से ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की गई, जिससे संदेश जाए कि “आतंकवादी” गतिविधि जैसी साजिश रची गई और कांग्रेस के सर्वोच्च नेतृत्व की सहमति से उसे अंजाम दिया गया। इसी नजरिए का परिचय देते हुए दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार आठ प्रदर्शनकारियों पर आपराधिक षडयंत्र और दंगे में शामिल होने से जुड़ी धाराएं लगा दी हैं। हैरतअंगेज यह है कि दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इन आरोपों में दम माना और प्रदर्शनकारियों को पुलिस रिमांड में भेज दिया। मुद्दा है कि आखिर ऐसी कौन-सी जानकारियां हो सकती हैं, जो पुलिस उनसे उगलवाना चाहती है? दरअसल, यह घटना भारत में प्रतिरोध को अपराध मानने की दिशा में एक नया मुकाम है। सवाल वाजिब है कि जब मुख्य विपक्षी दल से जुड़े युवा संगठन के प्रति न्याय व्यवस्था का ऐसा नजरिया है, तो व्यवस्था पर बुनियादी सवाल उठाने वाले संगठन आज के दौर में संवैधानिक प्रावधानों के तहत कितनी आजादी की उम्मीद रख सकते हैं?


Previous News Next News

More News

कांग्रेस के सामने ईडी का खतरा

September 14, 2026

कांग्रेस पार्टी के सामने राजनीतिक चुनौती तो भारतीय जनता पार्टी और नरेंद्र मोदी की है ही लेकिन एक बड़ी चुनौती प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की है। वह चुनौती कब और कहां से कांग्रेस को परेशान करने लगेगी यह पता नहीं चल पाता है। कांग्रेस के एक जानकार नेता ने कहा कि कई बार लगता है…

कांग्रेस के कहने से ईडी की कार्रवाई!

September 14, 2026

एक तरफ कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों के नेता आरोप लगाते हैं कि केंद्र सरकार ईडी और दूसरी केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग करती है और विपक्षी पार्टियों के नेताओं पर कार्रवाई कराती है तो दूसरी ओर कांग्रेस और भाजपा विरोधी दूसरी पार्टियों के ही नेता आरोप लगा रहे हैं कि ईडी कुछ कांग्रेस नेताओं के…

केरलम में राहुल बनाएंगे नया अध्यक्ष

September 14, 2026

कांग्रेस पार्टी कई राज्यों में नया प्रदेश अध्यक्ष बनाने जा रही है। इसमे सबसे पहले केरलम में फैसला हो सकता है। जानकार सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी केरलम में अपनी पसंद के नेता को अध्यक्ष बनवाएंगे। यह भी कहा जा रहा है कि जिस तरह से उन्होंने तमिलनाडु में पार्टी के सबसे मुखर नेताओं में…

ब्रिक्स के दौरान सर्जियो गोर दिल्ली छोड़ गए

September 14, 2026

दिल्ली में दुनिया भर के नेताओं का जमावड़ा था। नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को ब्रिक्स के 18वें सम्मेलन की मेजबानी भारत कर रहा था। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दोनों भारत आए थे। यह बहुत बड़ा घटनाक्रम था। दो साल पहले दिल्ली में हुए जी 20…

गाणपत्य मीमांसा और आधुनिक जीवनशैली

September 14, 2026

मुद्गल पुराण में गणेश के आठ अवतारों का वर्णन मिलता है, जो किसी असुर को मारने के लिए नहीं, बल्कि मानव मन के भीतर छिपे आठ मानसिक विकारों का शमन करने के लिए अवतरित हुए थे। वक्रतुण्ड, मत्सरासुर अर्थात मत्सर, ईर्ष्या के शमन हेतु अवतरित हुए थे, यह सोशल मीडिया पर दूसरों की प्रगति देखकर…

logo