एक शोध के अनुसार, टीवी पर बहस में एंकरों द्वारा आक्रामक लहजे का इस्तेमाल 80 प्रतिशत से अधिक होता है, जो दर्शकों पर नकारात्मक मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालता है। ये आंकड़े बताते हैं कि बहसें अब सूचना का स्रोत नहीं, बल्कि प्रचार का हथियार बन चुकी हैं। … भारत की टीवी बहसें लोकतंत्र का मजाक बन… Continue reading टीवी बहस के नाम पर जो है वह
