‘धुरंधर’ जहां अपने विशाल सेट्स, हाई-ऑक्टेन एक्शन और स्टार पावर के दम पर दर्शकों को बांधती है, वहीं ‘नुक्कड़ नाटक’ अपने विचारों और भावनाओं के सहारे आगे बढ़ती है। यह एक ऐसा अंतर है, जो दोनों फ़िल्मों को अपने-अपने स्थान पर महत्वपूर्ण बनाता है। सिने-सोहबत आज के समय में जब सिनेमाघरों और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर… Continue reading सादगी का साहस: ‘नुक्कड़ नाटक’
