जनगणना में स्पष्टता, पारदर्शिता और निष्पक्षता सर्वोपरि : मोहन यादव

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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आगामी समय में होने वाली जनगणना को पिछली जनगणना से अलग बताते हुए कहा है कि इसमें स्पष्टता, पारदर्शिता और निष्पक्षता सर्वोपरि रहनी चाहिए। सीएम मोहन यादव ने शुक्रवार को राजधानी भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में ‘जनगणना – 2027’ पर केंद्रित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन का शुभारंभ किया। 

सीएम मोहन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कार्यक्रम से जुड़ी फोटो शेयर करते हुए लिखा, “आज भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में ‘जनगणना – 2027’ पर केंद्रित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन का शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में ऐतिहासिक जनगणना होने जा रही है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि इसके क्रियान्वयन में मध्य प्रदेश, देश के लिए आदर्श मॉडल बनकर उभरेगा और भारत सरकार की अपेक्षाओं एवं उद्देश्यों की सफल पूर्ति करेगा।

उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि जनगणना देश की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण डाटा प्रक्रिया है। इसके आधार पर सरकार की योजनाएं बनती हैं, संसाधनों का वितरण तय होता है और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास को पहुंचाने की रणनीति तैयार होती है।

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मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इस बार की जनगणना भले ही आंठवीं है, लेकिन सबसे अलग है। कोविड के कठिन काल में स्वाभाविक रूप से जनगणना संभव नहीं थी, लेकिन अब हमें अधिक शुद्धता और पारदर्शिता के साथ यह दायित्व निभाना है। गणनाओं की शुद्धता और बारीकियों के लिए प्रशिक्षण हुआ है, अब प्रतिबद्धता और निष्पक्षता सबसे पहली शर्त है।

सीएम मोहन यादव ने जनगणना के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि जनगणना के कई अर्थ निकाले जाएंगे, इसलिए स्पष्टता, पारदर्शिता और निष्पक्षता सर्वोपरि रहनी चाहिए। 1931 के बाद सामाजिक स्तर की इस प्रकार की जनगणना पहली बार हो रही है, हम सब मिलकर एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाने जा रहे हैं। विकास का कारवां भी बढ़े और व्यवस्थाओं का नियंत्रण भी हाथ में रहे।

उन्होंने अधिकारियों से मानवीय संवेदनाएं ध्यान में रखकर जनगणना करने पर जोर देते हुए कहा कि किसी का मकान, जमीन या दुकान प्रभावित होती है तो उसके मन का लगाव भी समझना होगा, विकास के साथ संवेदनशीलता अनिवार्य है।

उन्होंने त्योहारों के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतने को लेकर अधिकारियों से कहा कि जनगणना के दौरान पड़ने वाले महाशिवरात्रि और होली जैसे पर्वों पर प्रशासन हाई अलर्ट पर रहे। आदर्श होली ऐसी हो कि लोगों को कष्ट कम हो और सामाजिक समरसता की भावना प्रकट हो। दक्षता के आधार पर परस्पर सौहार्द के बेहतर उदाहरण प्रस्तुत होने चाहिए। राज्य सरकार वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ मना रही है। 2026 किसान कल्याण वर्ष के रूप में घोषित है। कृषकों को किसी प्रकार की कठिनाई नहीं आनी चाहिए। नरवाई जलाने की समस्या को स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के आधार पर शून्य तक लाने का प्रयास करें। इसके साथ ही दलहन-तिलहन के उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में ठोस प्रयास करें।

Pic Credit : ANI


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