विपक्ष का एजेंडा क्या होगा?

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संसद के बजट सत्र और पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद पहली बार विपक्षी पार्टियों की बैठक होने जा रही है। आठ जून को दिल्ली में बैठक होगी, जिसमें तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी भी शामिल होंगी। इससे पहले आमतौर पर वे बैठकों में शामिल नहीं होती थीं। यह तय है कि एमके स्टालिन की पार्टी इससे दूर रहेगा। आम आदमी पार्टी और लेफ्ट की कांग्रेस से नाराजगी है लेकिन दोनों के प्रतिनिधि बैठक में शामिल होंगे। लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि इसका एजेंडा क्या होगा? विपक्षी पार्टियां भाजपा के ऊपर विपक्ष को दबाने और एजेंसियों के दुरुपयोग से पार्टियों को तोड़ने के आरोपों को दोहराने के अलावा क्या करेंगी? क्या उनके पास आगे के राजनीतिक अभियान की कोई रूपरेखा है?

यह सवाल इसलिए है क्योंकि कांग्रेस हो या कोई दूसरी विपक्षी पार्टी किसी ने पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत बढ़ने, महंगाई बढ़ने, नीट यूजी के पेपर लीक, 12वीं की परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच आदि में हुई गड़बड़ियों को लेकर आंदोलन नहीं किया है। राहुल गांधी ने सबसे अच्छा किया तो कुछ वीडियो बनाए, कुछ सोशल मीडिया पोस्ट लिखी और 12वीं के उन छात्रों से मिले, जिन्होंने सरकार के सिस्टम को एक्सपोज किया। ये तरीके भी ठीक हैं लेकिन इन सबके विरोध में कोई प्रदर्शन नहीं हुआ या कहीं पर धरना देने विपक्ष के नेता नहीं उतरे। यहां तक कि उत्तर प्रदेश में भी, जहां नौ महीने के बाद चुनाव होने वाले हैं वहां भी विपक्षी पार्टियों ने कोई प्रदर्शन नहीं किया।

तभी सवाल है कि क्या विपक्षी पार्टियां ऐसे किसी प्रदर्शन या आंदोलन की तैयारी करेंगी? क्या महंगाई और परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ विपक्ष सड़क पर उतरेगा? मुश्किल लग रहा है और अगर ऐसी कोई तैयारी होती भी है तो उसके लिए देर हो गई है क्योंकि वैकल्पिक विचार के तौर पर उभरे कॉकरोच जनता पार्टी ने पहले ही प्रदर्शन का ऐलान कर दिया है। यह अभी तक को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक अकाउंट की तरह था लेकिन इसने प्रवक्ता नियुक्त किए हैं और पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस करके छह जून को जंतर मंतर पर बड़ा प्रदर्शन करने की जानकारी दी है। इसके संस्थापक अभिजीत दिपके ने अमेरिका से रवाना होने से पहले इसकी घोषणा की थी और लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने उनके समर्थन में दिल्ली पहुंचने का ऐलान किया है। सो, इन मुद्दों पर प्रतिपक्ष का स्पेस कॉकरोच जनता पार्टी ने ले लिया है। अब कांग्रेस अपने कार्यकर्ता को कह रही है कि वह कॉकरोच जनता पार्टी को इग्नोर करे और जंतर मंतर के प्रदर्शन से दूर रहे। सोचें, पार्टी ने खुद प्रदर्शन नहीं किया, खुद विपक्ष की जिम्मेदारी नहीं निभाई और दूसरा निभा रहा है तो कार्यकर्ताओं को उससे दूर रहने की नसीहत दी जा रही है। बहरहाल, ऐसा लग रहा है कि विपक्ष की बैठक एक औपचारिकता से ज्यादा कुछ नहीं होने वाली है।


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