जेएमएम से बात नहीं बनी है!

Categorized as राजनीति

झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रमुख और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन लंदन में थे, जिस समय उनके पिता स्वर्गीय शिबू सोरेन को पद्म भूषण देने की घोषणा हुई। हेमंत सोरेन दावोस गए थे, जहां से लौटते हुए लंदन में रूके और वहां आदिवासी अस्मिता से जुड़े कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। वे मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के कॉलेज भी गए और उनसे जुड़ी चीजें देखीं। पद्म भूषण की घोषणा के बाद उन्होंने सोशल मीडिया में एक लंबी पोस्ट के जरिए पूरे झारखंड और वहां के लोगों की ओर से केंद्र सरकार का धन्यवाद दिया। उनके भाई बसंत सोरेन ने भी केंद्र सरकार का धन्यवाद दिया। यह भाजपा, केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और जेएमएम के बीच बर्फ पिघलने का संकेत माना जा रहा है। हालांकि प्रदेश भाजपा नेताओं ने हेमंत पर हमले जारी रखे हैं। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस बात के लिए हमला किया कि गणतंत्र दिवस के दिन हेमंत झारखंड में नहीं थे, जबकि यह परंपरा रही है कि मुख्यमंत्री उस दिन दुमका में झंडा फहराते हैं। इतना ही नहीं बाबूलाल मरांडी ने शिबू सोरेन को पद्म भूषण देने पर कोई सोशल मीडिया पोस्ट नहीं लिखी। उन्होंने झारखंडवासियों को बधाई नहीं दी और न प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया।

इससे यह तो जाहिर हुआ कि झारखंड को लेकर केंद्र सरकार और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के मन में कुछ और चल रहा है, जबकि प्रदेश नेतृत्व अलग लाइन पर है। जानकार सूत्रों का कहना है कि जेएमएम के साथ पिछले कई महीनों से इस बात को लेकर चर्चा चल रही है कि भाजपा और जेएमएम में तालमेल हो जाए। हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री बने रहें और भाजपा उनकी सरकार में शामिल हो जाए। शिबू सोरेन को पद्म भूषण दिए जाने को उससे ही जोड़ कर देखा जा रहा है। हालांकि इसका एक तात्कालिक कारण यह है कि पश्चिम बंगाल और असम में अगले तीन महीने में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं और इन दोनों राज्यों में अच्छी खासी आदिवासी आबादी है। उसमें भी संथाल आदिवासियों की संख्या सबसे ज्यादा है। ध्यान रहे हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार को धन्यनाद देते हुए यह भी कहा कि शिबू सोरेन का सम्मान देश के सभी जनजातीय समूहों का सम्मान है। निश्चित रूप से बंगाल और असम के चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री इस मुद्दे को उठाएंगे और शिबू सोरेन को सम्मान दिए जाने का जिक्र करेंगे।

बहरहाल, ऐसा लग रहा है कि झारखंड में गठबंधन और भाजपा के हेमंत सरकार में शामिल होने की बात पूरी तरह बन नहीं पाई है। हालांकि शुरुआत हो गई है। बताया जा रहा है कि अगर बात बन गई होती तो शिबू सोरेन को भारत रत्न या कम से कम पद्म विभूषण मिलता। ध्यान रहे मोदी सरकार पर पहले भाजपा के धुर विरोधी रहे मुलायम सिंह यादव और शरद पवार जैसे नेताओं को पद्म विभूषण से सम्मानित कर चुकी है। शिबू सोरेन को पद्म भूषण मिला तो उनके बेटे बसंत सोरेन ने उनको भारत रत्न का हकदार बताया। सो, अभी थोड़ा इंतजार करना होगा। दोनों तरफ से टकराव कम हुआ है। थोड़ी नरमी आई है तो आगे का रास्ता भी बनेगा। जेएमएम से तालमेल का भाजपा को यह फायदा होगा कि आदिवासी विरोधी होने की उसकी छवि बदलेगी। दूसरी ओर जेएमएम को .यह फायदा बताया जा रहा है कि हेमंत सोरेन और परिवार के अन्य सदस्यों के सिर पर लटकी केंद्रीय एजेंसियों की तलवार हटेगी और राज्य को केंद्रीय मदद मिलनी शुरू होगी, जिससे ठहरे हुए विकास कार्य शुरू होंगे। जहां तक ईसाई और मुस्लिम वोट का सवाल है तो जेएमएम के नेता पूरे भरोसे में हैं कि वह वोट कहीं नहीं जा रहा है। हेमंत सोरेन भाजपा के साथ भी रहेंगे तब भी ईसाई और मुस्लिम वोट उनके साथ ही रहेंगे क्योंकि दोनों समूहों को पता है कि वे अपने दम पर कांग्रेस को नहीं जीता सकते हें।


Previous News Next News

More News

पीएम की कथनी और पार्टी की करनी

August 2, 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर नौ दिन में पांचवा वीडियो अपलोड किया है। पहले चार वीडियो को 90 करोड़ व्यूज मिले थे। ऐसा दिखाया जा रहा है कि ये वीडियो प्रधानमंत्री अपने मोबाइल से बना कर डाल रहे हैं। इसका मकसद ‘जेन जी’ यानी 14 से 29 साल की उम्र के…

चढ़ावा चोरी का नाटक फायदा करेगा या नुकसान

August 2, 2026

संसद के मानसून सत्र में दो स्तर पर राजनीतिक लड़ाई चल रही है। एक लड़ाई केंद्र सरकार और एनडीए बनाम विपक्ष की है। दूसरी लड़ाई विपक्ष के अंदर है। विपक्ष की पार्टियां एक दूसरे के खिलाफ स्कोर करने की संभावना तलाश रही हैं। तभी राहुल गांधी ने जब पेपर लीक को सबसे बड़ा मुद्दा बनाया…

जंतर मंतर के बाद क्या झारखंड की बारी

August 2, 2026

दिल्ली में जंतर मंतर पर धरने और प्रदर्शन के बाद यह अंदाजा लगाया जा रहा था कि अब किसकी बारी होगी। पहले ऐसा लग रहा था कि कॉकरोच जनता पार्टी के नेता बिहार जाएंगे क्योंकि अभिजीत दिपके ने कह दिया था कि वे दो दिन में बिहार पहुंचेंगे। कुछ लोग मांग कर रहे थे कि…

उपेंद्र कुशवाहा का ध्यान रखने की मजबूरी

August 2, 2026

सोचें, भारतीय जनता पार्टी ने सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाया है। वे कुशवाहा समाज के सबसे बड़े नेता हैं। उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद किसी भी पार्टी के कुशवाहा नेता का कोई भविष्य नहीं बचा। राजद के संसदीय दल के नेता अभय कुशवाहा ने जाकर सम्राट चौधरी को गुलदस्ता दिया। इसके बावजूद भाजपा को उपेंद्र…

हिंदुओं को आखिर करना क्या है?

August 2, 2026

यह कंफ्यूजन इस बात से पैदा हुआ है कि दिल्ली में राज्य सरकार ने महिला सम्मान निधि के नाम पर महिलाओं को ढाई हजार रुपए देने की जो लक्ष्मी योजना शुरू की है उसमें एक प्रावधान किया गया है कि जिन महिलाओं के तीन या उससे ज्यादा बच्चे हैं उनको इस योजना का लाभ नहीं…

logo