हम खतरनाक समय में जी रहे हैं! और यह न रूपक में, न मनोदशा में, बल्कि मापी जा सकने वाली सच्ची बात है। यह किसी हेडलाइन या चिंता से उपजी अतिशयोक्ति नहीं है। यह विज्ञान है। मानवता अब आत्मविनाश के कितने करीब पहुँच चुकी है, इसका प्रतीक “डूम्सडे क्लॉक” का इस साल 89 सेकंड पर… Continue reading “हम वैश्विक तबाही की ओर बढ़ रहे हैं”
