घुसपैठ पर क्या सिर्फ राजनीति होगी?

अयोध्या में राममंदिर का निर्माण, देश भर में समान नागरिक संहिता लागू करने और जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का मुद्दा राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ और भारतीय जनसंघ का सबसे पुराना एजेंडा था। आजादी के तुरंत बाद से इस पर बहस हो रही थी और अलग अलग समय पर आंदोलन भी हुए। इनमें से दो… Continue reading घुसपैठ पर क्या सिर्फ राजनीति होगी?

असमानता और नियति ‘सुपरपावर इन वेटिंग!

लंदन के द इकॉनोमिस्ट ने ठिक लिखा कि “यदि अमेरिका भारत को अलग-थलग करता है, तो यह उसकी ऐतिहासिक भूल होगी। जबकि भारत के लिए अपनी सुपरपावर बनने की दावेदारी को परखने का यह मौका है।” पहली नज़र में वाक्य सुकून देता है — जैसे अमेरिका ग़लती करेगा अगर डगमगाया, और भारत नियति के द्वार… Continue reading असमानता और नियति ‘सुपरपावर इन वेटिंग!

अमेरिका की चाहत

दो बातें साफ हैं। ट्रंप प्रशासन को ‘आंख में आंख डाल कर’ बात करना और संप्रभुता का उल्लेख करना नागवार गुजरा है। कोई देश उससे बातचीत में अपने आर्थिक हितों की बात करे, यह उनके प्रशासन को मंजूर नहीं है। डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन क्यों भारत से खफा हुआ, इसके राज़ खुद उनके अधिकारी खोल रहे… Continue reading अमेरिका की चाहत

स्वदेशी आंदोलन 2.0 कितना कामयाब होगा

भारत में एक और स्वदेशी आंदोलन का आह्वान किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से अपने भाषण में इसका आह्वान किया और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लागू होने से पहले यानी 27 अगस्त से पहले उन्होंने कई बार यह आह्वान दोहराया।… Continue reading स्वदेशी आंदोलन 2.0 कितना कामयाब होगा

मुंबई में अनिश्चितता और न्यूयार्क में भरोसा!

कुछ दिनों से मैं मुंबई में हूँ। यह महानगर  उभरते भारत की झिलमिलाहट बतलाता हुआ है। काँच की इमारतें मानसून के आसमान को छूती हैं। नया कोस्टल रोड अरब सागर पर किसी रिबन की तरह खुलता चला जाता है। यह वही शहर है जो न्यूयॉर्क बनने का सपना देखता है। तभी लगातार निर्माणाधीन स्काइलाइन, वॉल… Continue reading मुंबई में अनिश्चितता और न्यूयार्क में भरोसा!

तलवार गिर पड़ी है

ट्रंप के टैरिफ से भारत के 55 फीसदी निर्यात प्रभावित होंगे, जिनका मूल्य 47 से 48 बिलियन डॉलर है। अमेरिका का जो रुख है, उसे देखते हुए नहीं लगता कि निकट भविष्य में भारत को कोई रियायत मिलने जा रही है। अमेरिकी टैरिफ लागू होते ही ये चिंताजनक खबर आई है कि तिरुपुर, नोएडा, और… Continue reading तलवार गिर पड़ी है

राहुल पर हमले की थीम बदल गई

राहुल गांधी पर भाजपा के हमले की थीम बदल गई है। अब उनको शातिर, साजिशी और देश विरोधी बताने का अभियान चल रहा है। ध्यान रहे नरेंद्र मोदी और अमित शाह के भाजपा की कमान संभालने के बाद राहुल गांधी के खिलाफ जो व्यापक प्रचार अभियान चला उसकी थीम उनको पप्पू साबित करने की थी।… Continue reading राहुल पर हमले की थीम बदल गई

इक्कीसवीं सदी में अकाल, भूख!

हम असाधारण समय में जी रहे हैं। इक्कीसवीं सदी में कैसी सुर्ख़ियां पढ़ने को मिल रही है। बात दो टूक है।   साफ कहां जा रहा है कि “ग़ाज़ा में अकाल घोषित हो चुका है। क्या कुछ बदलेगा?” सवाल पूछे जाने से पहले ही जवाब तय था: नहीं। और यही समय की असाधारणता याकि असाधारण क्रूरता… Continue reading इक्कीसवीं सदी में अकाल, भूख!

तालिबानी राज में आधी आबादी जंजीरों में!

विडंबना है कि अफ़ग़ानिस्तान ने 15 अगस्त को जब स्वतंत्रता दिवस मनाया, तो गुलाब की पंखुड़ियाँ उन मर्दों पर बरसीं जिन्होंने आधे देश को पिंजरे में कैद कर रखा है। तालिबान का शासन अब दूसरे दौर के पाँचवें साल में दाख़िल है। इन पांच वर्षों में कुछ बदला नहीं। वह दुनिया का इकलौता देश है… Continue reading तालिबानी राज में आधी आबादी जंजीरों में!

एक नॉर्वे है और एक रामजी का भारत!

पहली खबर नॉर्वे की है। नॉर्वे सरकार के पेंशन का एक वैश्विक सॉवरेन वेल्थ फ़ंड (GPFG) है। लगभग दो ट्रिलियन डॉलर का कोष। इसे वहां की सरकार ने 1990 में तेल की कमाई को जमा करते हुए बनाया। यह विश्व में निवेश कर देशवासियों की पेंशन संभालता है। इसे किस देश, किस कंपनी में निवेश… Continue reading एक नॉर्वे है और एक रामजी का भारत!

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