गांधी से राम तक: भारत की आत्मा और पहचान की लड़ाई

गांधी की करुण पुकार “हे राम” और “जय श्रीराम” का हुंकार—इन दोनों के बीच का द्वैत, आज के भारत में उभरते वैचारिक विभाजनों का प्रतीक है। ये विभाजन केवल भाषणों तक सीमित नहीं, बल्कि हमारे सामाजिक ताने-बाने तक गहरे जा पहुँचे हैं। तभी इतिहास से सबक लेने की आवश्यकता है।.. हमारे पास दो रास्ते हैं—या… Continue reading गांधी से राम तक: भारत की आत्मा और पहचान की लड़ाई

ओमान के बाद न्यूजीलैंड!

ओमान के साथ पिछले वित्त वर्ष में भारत का कुल कारोबार 10.6 बिलियन डॉलर था। न्यूजीलैंड के साथ 1.3 बिलियन डॉलर का कारोबार हुआ था। उम्मीद है कि इन देशों में भारत के सेवा क्षेत्र की अब अधिक पैठ बन सकेगी। खबर है कि यह साल खत्म होने से पहले न्यूजीलैंड के साथ भारत का… Continue reading ओमान के बाद न्यूजीलैंड!

धरातल की असमानता

इलेक्ट्रॉल ट्रस्ट्स में मौटे तौर पर पूंजीपति ही योगदान करते हैं। इलेक्ट्रॉल बॉन्ड्स के जरिए वे ही चंदा दे रह थे। मगर यह नहीं लगता कि इलेक्ट्रॉल बॉन्ड्स के रद्द होने से राजनीतिक चंदे के स्वरूप पर कोई फर्क पड़ा है। विभिन्न इलेक्ट्रॉल ट्रस्ट्स ने 2024-25 में विभिन्न पार्टियों को दिए गए चंदे की जो… Continue reading धरातल की असमानता

ट्रस्ट का चंदा भी भाजपा को ही

विपक्षी पार्टियों और सिविल सोसायटी के प्रयास से चुनावी बॉन्ड का मामला अदालत में पहुंचा था और सर्वोच्च अदालत ने इसे अवैध बताते हुए समाप्त कर दिया था। विपक्ष का आरोप था कि बॉन्ड के जरिए चंदे के कानून के तहत इतनी गोपनीयता बना दी गई है कि पता नहीं चल पा रहा है कि… Continue reading ट्रस्ट का चंदा भी भाजपा को ही

मनरेगा को बुलडोजर करने का नैरेटिव

कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कानून यानी मनरेगा को समाप्त करके उसकी जगह विकसित भारत जी राम जी बिल लाने के खिलाफ जो नैरेटिव बना रही है उसमें बुलडोजर शब्द का खास इस्तेमाल किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि सरकार ने महात्मा गांधी के नाम से बने… Continue reading मनरेगा को बुलडोजर करने का नैरेटिव

महाजंगलराज का जुमला कितना चलेगा

ऐसा लग रहा है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा किसी बड़े नैरेटिव और नारे की तलाश में है। अभी तक उसे कोई एक सेंट्रल नैरेटिव और एक मुख्य नारा नहीं मिल पाया है। अब प्रधानमंत्री महाजंगलराज का नारा आजमा रहे हैं। उन्होंने शनिवार, 20 दिसंबर को पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव प्रचार… Continue reading महाजंगलराज का जुमला कितना चलेगा

तमिलनाडु और बंगाल में एसआईआर का फर्क

यह बहुत हैरान करने वाली बात है कि तमिलनाडु में, जहां बिहार से कम और पश्चिम बंगाल के लगभग बराबर मतदाता थे वहां दोनों राज्यों के मुकाबले ज्यादा मतदाताओं के नाम कटे हैं। बिहार में कुल 69 लाख मतदाताओं के नाम कटे तो पश्चिम बंगाल में 58 लाख नाम कटे। लेकिन तमिलनाडु में 97 लाख… Continue reading तमिलनाडु और बंगाल में एसआईआर का फर्क

जुबिन की मौत में क्या सचमुच साजिश हुई है?

यह लाख टके का सवाल है क्योंकि सिंगापुर की पुलिस ने साजिश से इनकार किया है। सिंगापुर की पुलिस ने दूसरी बार इनकार किया है। पिछले दिनों वहां की पुलिस ने कहा कि दोहराया कि उसकी जांच में किसी तरह की साजिश की संकेत नहीं मिला है। सिंगापुर पुलिस बल यानी एसपीएफ ने गुरुवार, 18… Continue reading जुबिन की मौत में क्या सचमुच साजिश हुई है?

हिन्दू नेता अतीत-जीवी हैं

पिछले पचास वर्षों से देसी भारतीय नेताओं के पास केवल दलीय लड़ाई, गद्दी छीन-झपट की तिकड़में भर हैं। एक-दूसरे के प्रति द्वेष, झूठे-सच्चे आरोपों की पोटली है। उसी से लोगों को उकसाना और वोट-बटोरन मंसूबे ही उन की फुलटाइम चिन्ता दिखती है।… नेताओं का परनिंदक, शेखीबाज, और अतीतजीवी होना हिन्दू समाज की असमर्थता का संकेत… Continue reading हिन्दू नेता अतीत-जीवी हैं

संसद अमेरिका की और भारत की, इतना फर्क!

किसी भी लोकतंत्र में, सत्ता में कोई भी पार्टी क्यों न हो, ऐसे अधिकारियों को बुलाने, उन्हे जवाबदेह बनाने के कई लाभ हैं। सबसे पहले, यह जवाबदेही सुनिश्चित करता है। चुने हुए प्रतिनिधि कार्यकारी अधिकारियों से सवाल कर सकते हैं, जो जनता की ओर से होता है। इससे भ्रष्टाचार, दुरुपयोग या नीतिगत असफलताओं पर रोशनी… Continue reading संसद अमेरिका की और भारत की, इतना फर्क!

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