चीन सीमा पर भारत बना रहा ढ़ाचा

नई दिल्ली। अमेरिकी मीडिया हाउस वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि चीन से लगती सीमा पर भारत बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा तैयार कर रहा है। रिपोर्ट में कहा है कि चीन से होने वाले किसी संभावित टकराव को ध्यान में रखते हुए भारत उससे निपटने के लिए सीमा के… Continue reading चीन सीमा पर भारत बना रहा ढ़ाचा

राष्ट्रपति मुर्मू ने पनडुब्बी में यात्रा की

बेंगलुरू। सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान राफेल में उडान भरने के बाद अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पनडुब्बी में यात्रा की। समुद्र में पनडुब्बी की यात्रा करने वाली वे देश की दूसरी राष्ट्रपति बनी हैं। उनसे पहले राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने पनडुब्बी में यात्रा की थी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को कर्नाटक के कारवाड़… Continue reading राष्ट्रपति मुर्मू ने पनडुब्बी में यात्रा की

संगठित होने की मजबूरी

यह मुद्दा चर्चा में था कि क्या कभी गिग कर्मियों को संगठित किया जा सकता है अथवा क्या वे संगठित होकर अपने हित की लड़ाई लड़ सकेंगे। ऐसे सवालों का जवाब बदलते हालात और नई उभरी परिस्थितियों ने दे दिया है। ऐप आधारित गिग कर्मी ‘कर्मचारी’ या ‘मजदूर वर्ग’ की श्रेणी में आते हैं या… Continue reading संगठित होने की मजबूरी

दरक रही हैं ईंटें

न्यायपालिका की मंशा पर अब खुलेआम प्रश्न खड़े किए जाने लगे हैं। न्यायपालिका वह अंतिम संस्था है, जो संवैधानिक में लोगों के भरोसे को कायम रखती है। मगर अब यह मान्यता भी टूट रही है। इस गिरावट को तुरंत रोकना अनिवार्य है। भारत में संवैधानिक व्यवस्था की बुनियाद पर एक के बाद एक चोट लग… Continue reading दरक रही हैं ईंटें

क्रिसमस, आतंकवाद और बेबस यूरोप

आखिर भय का माहौल कौन बना रहा है? फ्रांसीसी मीडिया में मैनहैटन इंस्टीट्यूट के आप्रवासन सदस्य डैनियल डी मार्टिनो के हवाले से कहा गया है, “स्पष्ट है कि यह यूरोप में बिना समुचित जांच के बड़े पैमाने पर मुस्लिम प्रवासन का परिणाम है।” यह घटनाक्रम एक ऐसे गहरे संकट को उजागर करता है, जिसमें तथाकथित… Continue reading क्रिसमस, आतंकवाद और बेबस यूरोप

सबकी खुशहाली के बिना कैसा लोकतंत्र?

हकीकत यह है कि जो राजनीतिक अधिकार मिले होते हैं, समाज की बहुसंख्यक आबादी उनके उपभोग के लिए भी सक्षम नहीं होती। उन्हें सक्षम बनाने का दायित्व राज्य नहीं लेता। ऐसे में सारे अधिकार वास्तव में प्रभु वर्ग के लिए सीमित रह जाते हैं। इसीलिए ऐसे चुनावी लोकतंत्र में बनने वाली सरकारें प्रभु वर्ग के… Continue reading सबकी खुशहाली के बिना कैसा लोकतंत्र?

प्रेम गुप्ता फिर लड़ेंगे राज्यसभा चुनाव!

बिहार में पांच राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं और मार्च में होने वाले दोवार्षिक चुनावों में इन सीटों पर चुनाव होगा। एनडीए के विधायकों की संख्या 202 है, जबकि पांचों सीटें जीतने के लिए 205 वोट की जरुरत है। एक सीट के लिए 41 वोट चाहिए। दूसरी ओर महागठबंधन के पास 35 वोट हैं,… Continue reading प्रेम गुप्ता फिर लड़ेंगे राज्यसभा चुनाव!

मतुआ मतदाताओं को बरगला रहे हैं मंत्री

पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा राजनीति अगर किसी एक जाति को लेकर हो रही है तो वह मतुआ समुदाय है। इसकी आबादी को लेकर भी कई तरह के भ्रम फैलाए गए हैं। मोटे तौर पर मतुआ आबादी 50 से 60 लाख है लेकिन एक से तीन करोड़ तक का दावा किया जाता है। 2011 की… Continue reading मतुआ मतदाताओं को बरगला रहे हैं मंत्री

बांग्लादेश का असर पश्चिम बंगाल में

हिंदुओं पर अत्याचार की घटनाएं लगातार हो रही हैं और पश्चिम बंगाल में उन हिंदुओं की जाति बता कर राजनीति हो रही है। पश्चिम बंगाल के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि 18 दिसंबर को जिस हिंदू युवक की हत्या की गई थी और पेड़ पर लटका कर जिंदा जला दिया गया था… Continue reading बांग्लादेश का असर पश्चिम बंगाल में

चिराग, कुशवाहा और मांझी की खींचतान

बिहार में राज्यसभा की एक सीट को लेकर चिराग पासवान, उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी के बीच खींचतान चल रही है। उपेंद्र कुशवाहा राज्यसभा सांसद हैं। लोकसभा का चुनाव हारने के बाद पिछले साल उनको राज्यसभा भेजा गया था। उनका कहना है कि उनसे कमिटमेंट है। पिछली बार उनको चार साल की बजाय दो… Continue reading चिराग, कुशवाहा और मांझी की खींचतान

logo