आंखें थकती नहीं। दिमाग रुकता नहीं। तब भला बुढ़ापा कैसा होगा? मैं बूढ़ा नहीं हूं, लेकिन उम्र सत्तर की है। और दिमाग ने लगभग पचास साल भारत और भारत के लोगों पर गौर करते हुए बिताए हैं तो शायद यही वजह है जो कोई दिन ऐसा नहीं आता जब यह सवाल मन में न उठे… Continue reading हम लुढ़कने के लिए ही हैं!
