संवाद परिक्रमा का परिचय
संवाद परिक्रमा की जड़ें 1979 से चली आ रही फीचर सेवा में हैं। पत्रकार और संपादक हरिशंकर व्यास की इस पहल का उद्देश्य हिंदी मीडिया को बेहतर सामग्री और पत्रकारों को अपनी पहचान का मंच देना है।
परिचय और उद्देश्य
संवाद परिक्रमा क्या हैं?
संवाद परिक्रमा यों 1979 से फीचर प्रदाता एजेंसी हैं। बतौर फीचर एजेंसी दशकों से यह पीआईबी एक्रीडेटेड है। अखबारों को लेख/समाचार फीचर मुहैया कराती रही है। यह हिंदी पत्रकार-संपादक-एंकर हरि शंकर व्यास का अब नए रूप में नया प्रयोग है। एजेंसी नए वक्त की नई पीढ़ी की एक ऐसी फीचर,कटेंट प्रदाता/ समाचार सेवा बनने की कोशिश में है जिससे मीडियाकर्मी और मीडिया को एक नया प्लेटफार्म उपलब्ध हो। कंटेंट लेन-देन का एक्सचेंज बने। हिंदी कंटेंट का सुपर बाजार बने!
दरअसल हिंदी पत्रकारों के गुम होते अस्तित्व की चिंता में यह एक नया प्रयोग है। इसमें हिंदी लेखकों, पत्रकारों, संपादकों, फोटोग्राफरों, स्ट्रींगरो का नाम और काम का डेटाबेस बनाने की कोशिश होगी तो उनके काम की प्रस्तुती बनवाने की कोशिश भी होगी। जिन्हे सामग्री चाहिए वे इस डेटाबेस से तुरत अच्छा, जरूरत माफिक कंटेट पा सके, यह एक मकसद है।
एक उद्देश्य हर पल खबरों से जुडे और जोड़े रखना भी है। इसमें आप ऐप के जरिए खबरें देख-पढ़ और ले सकते हैं। मौके/ घटनास्थल पर मौजूद संवाददाताओं / लोगो द्वारा भेजी खबरों व फोटो को देख और पढ़ सकेगें।
यदि आप पत्रकार, फोटोग्राफर है तो अपनी खबर व फुटेज और फोटो को यहां अपलोड करके उसे यूजर के आगे प्रस्तुत कर सकते हैं। यह प्रयोग भविष्य में बेच सकने की सुविधा में भी बदल सकता है। हालांकि हिंदी पत्रकारिता में यह फिलहाल बहुत असंभव काम है!
कुल मिलाकर संवाद परिक्रमा की कल्पना में पत्रकारिता करने वालों के लिए विकसिकत यह प्लेटफार्म है। संवाद परिक्रमा एक अखबार के समान भी है, लेकिन यह वह है नहीं। यहां कोई प्रधान संपादक नहीं, और न कोई विज्ञापन। पत्रकार जो लिखना चाहें, लिख सकते हैं और पाठकों व प्रकाशकों का ध्यान खींच सकते हैं। हमारा मकसद पत्रकारों को एक प्लेटफार्म मुहैया कराना है ताकि वे अपने कंटेंट दे सकें, चाहे वे किसी भी मीडिया के क्यों न हों।
संवाद परिक्रमा ही क्यो?
हिंदी में आज लिखने, पत्रकारिता करने का स्वतंत्र मंच नहीं है। बहुत संकट है। पहली जरूरत अच्छा लिख,उसे अच्छी जगह लगवाने, रखने की है। संवाद परिक्रमा की खूबी होगी कि आपका लिखा कांट-छांट कर तराशा जाएगा। आप जो मैटर भेजेगें उसमें दम लगा तो उसे पठनीय बना कर पेश किया जाएगा। संवाद परिक्रमा लेख के साथ छपे नाम को, पत्रकार को महत्व देती हैं। संवाद परिक्रमा कोई अखबार विशेष या समाचार पोर्टल नहीं हैं, बल्कि यह तो हिंदी मीडिया और मीडियाकर्मियों के लिए बना एक मंच है, जहां पत्रकार खुद ब्रांड भी बन सकते हैं।
संवाद परिक्रमा किसके लिए?
अखबार-मीडिया समूह के लिए – यह प्लेटफार्म हिंदी के छोटे और मध्यम श्रेणी के अखबार, क्षेत्रीय-केबल टीवी चैनल से लेकर वेबसाइट और नए मीडिया के बडे संकट का एक समाधान है। इन सबका यदि आज नंबर एक संकट है तो कम खर्च पर अच्छा हिंदी कंटेंट उपलब्ध नहीं होना है। भर्ती की सामग्री से संपादकीय व फीचर पेज भरे जा रहे है। सो संवाद परिक्रमा अपनी टीम और इस प्लेटफार्म पर उपलब्ध स्वतंत्र पत्रकारों की अपलोड की गई सामग्री को एक्सक्लूजिव या मासिक अनुबंध पर सिंडीकेटेड सामग्री मुहैय्या कराने की सुविधा देती है।
पत्रकारों के लिए- संवाद परिक्रमा नियमित रूप से छपने या फ्रीलांस पत्रकारिता करने वालों को एक मंच उपलब्ध कराता है, लिखे का पाठक वर्ग बना सकता है। यहां न कोई सर्व-शक्तिमान संपादक है, न किसी की ओर से कुछ रोके जाने का दबाव है। आप अपनी पत्रकारिता- खबरनवीसी-लेखन-फोटोग्राफी कौशल को संवाद परिक्रमा के जरिए अभिव्यक्त कर सकते है। यहां लिख सकते है ( मगर हां,पत्रकारिता के कायदे और गाईडलाइन में) और शेयर करते हुए उसे मीडिया समूह को उपलब्ध करा सकते है।
अपने आपको बताएं
हिंदी पत्रकारों के लिए ठिकाना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आपको अपनी पत्रकारिता, लेखन, फोटो-वीडियोग्राफी के काम को प्रदर्शन करने का यह मंच है। एक बार रजिस्टर्ड हुए और काम बताते रहे तो भविष्य के एसाइनमेंट की संभावना भी बन सकेगी। दूरदराज के किसी कस्बे या जिले में कोई घटना हुई और मीडिया समूह ने यदि उसे कवर करने की जरूरत महसूस की तो वह संवाद परिक्रमा के इस डेटाबेस से उस कस्बे के स्वतंत्र पत्रकार को छांट कर उसे अपना एसाइनमेंट भी दे सकता है।
संवाद परिक्रमा का तरीका?
संवाद परिक्रमा आपके फोटो, वीडियो और लेखों को मीडिया संस्थानों को बेचने का एक प्लेटफार्म है। कई अखबार, मीडिया समूह और प्रसारक संवाद परिक्रमा एजेंसी की सेवा लेते रहे है। स्वतंत्र पत्रकारों के इस नए प्रयोग में पेशेवर पत्रकारों और नागरिक पत्रकारों की उपलब्ध सामग्री को ये मीडिया संस्थान काम में ले सकते है। जितने ज्यादा आपके फोटो, वीडियो और लेख बिकेंगे, उस अनुसार आपकी आमद बन सकती है। जैसे ही किसी मीडिया संस्थान में आपका कंटेंट बिका, संवाद परिक्रमा आपके खाते में वहा से आया पैसा डाल देगा।
मुझे क्या मिलेगा?
पहले संतोष फिर मीडिया ठिकाने पर परिचय और यदि रिपोर्ट, लेख, फीचर-फोटो-वीडियों फुटैज अपलोड हुई तो शायद कोई उपयोक्ता उसका अपने मीडिया में उपयोग भी कर डाले। एक बार सिलसिला शुरू हुआ तो लगातार चलता रह सकता है।
आपका असली मेहनताना तो यह है कि आप बतौर पत्रकार काम करते है। पत्रकारी गतिविधियों में अभिव्यक्ति का मौका मिलता है। भविष्य में हम खोजी पत्रकारिता, विशेष रिपोर्टिंग के लिए भी एक फंड बनाने की तैयारी में हैं। मगर यह सब बाद की बात है। हिंदी मीडिया समूहों की दशा को देखते हुए भुगतान के सिलसिले में अभी कोई नीति नहीं है।
